विश्व की सबसे भयानक महामारी - काली मौत
14 वे सदी में हुई महामारी काली मौत ( the black death or plague) आज तक मानव इतिहास की सबसे भयानक महामारी है जिसमें 7. 50 से 20 करोड़ लोगों की जान गई थी।
सन् 1346 से 1351 यह महामारी दुनिया में आई थी।
कारण -
काली मौत प्लेग(plaque) या पेस्टीलेंस(pestilence) नाम से भी जाना जाता है। यह रोग yersinia pestis नाम के जीवाणु के कारण होता है। कहां जाता है की यह जीवाणु काले चुहो (flues) में पाते जातें हैं।
काली मौत प्लेग(plaque) या पेस्टीलेंस(pestilence) नाम से भी जाना जाता है। यह रोग yersinia pestis नाम के जीवाणु के कारण होता है। कहां जाता है की यह जीवाणु काले चुहो (flues) में पाते जातें हैं।
फैलाव -
इसकी सुरूवात मध्य आशियां से हुई थी। यह रोग चुहो मार्फत इंसानों में फ़ैला था। 14 वी सदी में ज्यादातर व्यापार समुद्र मार्ग से होता था जिसमें जहाजों का प्रयोग किया जाता था। जहाज मार्फत यह रोग यूरोप और उत्तरी अफ्रीका में फैला था, जहाजों में ज्यादातर अनाजों का व्यापार होता था जो एक देश से दूसरे देश में समुद्री मार्ग से पहुंचाया जाता था। अनाजों की पोतों पर ज्यादातर चूहे पनपते थे, यही यह रोग यूरोप और अफ्रीका में फैलने के लिए कारण बना।
इसकी सुरूवात मध्य आशियां से हुई थी। यह रोग चुहो मार्फत इंसानों में फ़ैला था। 14 वी सदी में ज्यादातर व्यापार समुद्र मार्ग से होता था जिसमें जहाजों का प्रयोग किया जाता था। जहाज मार्फत यह रोग यूरोप और उत्तरी अफ्रीका में फैला था, जहाजों में ज्यादातर अनाजों का व्यापार होता था जो एक देश से दूसरे देश में समुद्री मार्ग से पहुंचाया जाता था। अनाजों की पोतों पर ज्यादातर चूहे पनपते थे, यही यह रोग यूरोप और अफ्रीका में फैलने के लिए कारण बना।
लक्षण -
बुखार,
सिरदर्द
कब्ज़, दस्त और काले रंग का मल आना
बलगम के साथ खुश आना और खांसी
सास लेने में तकलीफ
त्वचा काली पड़ना
मतली और उल्टी
छाती में दर्द
मांसपेशियों मे दर्द
कमजोरी आदि
सिरदर्द
कब्ज़, दस्त और काले रंग का मल आना
बलगम के साथ खुश आना और खांसी
सास लेने में तकलीफ
त्वचा काली पड़ना
मतली और उल्टी
छाती में दर्द
मांसपेशियों मे दर्द
कमजोरी आदि
प्लेग के प्रकार -
प्लेग के तीन प्रकार होते हैं
प्लेग के तीन प्रकार होते हैं
बुबोनिक प्लेग ( bubonic plague)
इसमें बुखार, बदन दर्द, ठंड लगना आदि के साथ शरीर में गठान बनने लगते हैं।
इसमें बुखार, बदन दर्द, ठंड लगना आदि के साथ शरीर में गठान बनने लगते हैं।
सेपटीसेमिक प्लेग ( septicemic plague) -
इसमें खुन में जीवाणु की संख्या बढ़ने के कारण खुन की उलटी होती है। शरीर के कुछ भागों में खुन बहने के कारण त्वचा काली पड़ जाती है। इसमें बुखार, बदन दर्द, ठंड लगना आदि लक्षण दिखाई देते हैं।
इसमें खुन में जीवाणु की संख्या बढ़ने के कारण खुन की उलटी होती है। शरीर के कुछ भागों में खुन बहने के कारण त्वचा काली पड़ जाती है। इसमें बुखार, बदन दर्द, ठंड लगना आदि लक्षण दिखाई देते हैं।
नयुमोनिक प्लेग ( Pneumonic plague) -
यह प्लेग का सबसे गंभीर रूप है। फेफड़ों में संक्रमण बढ़ने के कारण निमोनिया होता है। जिसके कारण मरीज की मौत होती है।
यह प्लेग का सबसे गंभीर रूप है। फेफड़ों में संक्रमण बढ़ने के कारण निमोनिया होता है। जिसके कारण मरीज की मौत होती है।
परीणाम -
इसका परिणाम इतना भयंकर था कि यह मध्य एशिया से लेकर यूरोप और उत्तरी अफ्रीका में पहला था। उस समय तो नहीं आखिर लगभग एक तिहाई आबादी इसकी चपेट में आ गई थी। यूरोप में एक ही दिन में लगभग 50 लाख लोग मारे गए थे। यूरोप में कुल आबादी के लगभग 30 से 60% लोगों की मौत हो गई थी।
सन् 1346 - 13451 इस काल के दौरान इस रोग के कारण दुनिया में करीब करीब 7 करोड़ से लेकर 20 करोड़ तक लोगों की मौत हो गई थी।
उस समय दुनिया की आबादी लगभग 47 करोड़ थी जो इस महामारी के कारण 35 करोड़ रह गई।
मौसम में बदलाव के कारण इसका प्रकोप कुछ हद तक कम हुआं था।
इसका परिणाम इतना भयंकर था कि यह मध्य एशिया से लेकर यूरोप और उत्तरी अफ्रीका में पहला था। उस समय तो नहीं आखिर लगभग एक तिहाई आबादी इसकी चपेट में आ गई थी। यूरोप में एक ही दिन में लगभग 50 लाख लोग मारे गए थे। यूरोप में कुल आबादी के लगभग 30 से 60% लोगों की मौत हो गई थी।
सन् 1346 - 13451 इस काल के दौरान इस रोग के कारण दुनिया में करीब करीब 7 करोड़ से लेकर 20 करोड़ तक लोगों की मौत हो गई थी।
उस समय दुनिया की आबादी लगभग 47 करोड़ थी जो इस महामारी के कारण 35 करोड़ रह गई।
मौसम में बदलाव के कारण इसका प्रकोप कुछ हद तक कम हुआं था।
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